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Sunday, August 9, 2020
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[News Uttarakhand:] Uttarakhand High Court Order For Stop Tree Cutting In Chamoli On Prime Minister’s Road Scheme – उत्तराखंड: होईकोर्ट ने सड़क के लिए पेड़ों के कटान पर लगाई रोक, चीफ इंजीनियर से मांगा जवाब

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नैनीताल हाईकोर्ट ने चमोली जिले में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत सरकोट में बन रही सड़क के लिए जल स्रोत और पेड़ों को न काटे जाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने पेड़ों के कटान पर रोक लगा दी है। साथ ही मामले में सड़क योजना के चीफ इंजीनियर को चार जून तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार ग्राम सरकोट निवासी विनोद कुमार कुनियाल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत जिला चमोली में कुछ गांवों को मोटर मार्ग से जोड़ने का प्रस्ताव पास हुआ था, लेकिन सड़क बनाने के लिए चीफ इंजीनियर के सड़क का एलाइनमेंट बदलने से जल स्रोत और इन्हें रिचार्ज करने वाले पेड़ों के कटने से जल स्रोतों पर खतरा मंडरा रहा है।

याचिकाकर्ता का कहना था कि सड़क का एलाइनमेंट बदल कर इसे दूसरी जगह से बनाया जाए ताकि जलस्रोतों पर इसका प्रतिकूल असर न पड़े। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पेड़ों के कटान पर रोक लगाते हुए सड़क योजना के चीफ इंजीनियर से चार जून तक जवाब दाखिल करने को कहा है।

हाईकोर्ट ने सरयू नदी बागेश्वर में खनन कार्य में उपयोग की जाने वाली भारी मशीनों पर रोक लगाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता को तीन दिन के भीतर आपत्ति दाखिल करने के निर्देश दिए है। इस प्रकरण में मशीन ऑपरेटर की ओर से प्रार्थना पत्र दाखिल कर मशीनों से खुदाई की अनुमति देने की मांग की गई थी।

प्रार्थना पत्र में कहा गया था कि मैनुअली खनन में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए मशीन से खुदाई की अनुमति दी जाए। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार बागेश्वर निवासी प्रमोद कुमार मेहता ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि बागेश्वर नगर क्षेत्र में उपजिलाधिकारी बागेश्वर की ओर से नौ मार्च को एक निविदा प्रकाशित की गई थी। इसमें स्थानीय व्यक्तियों/संस्थाओं को सरयू नदी में रेता उपखनिज के निस्तारण उठान हेतु खुली नीलामी प्रक्रिया के लिए आमंत्रित किया गया था।

इसे याचिकाकर्ता ने इस आधार पर चुनौती दी थी कि खुली नीलामी की आड़ में प्रशासन माफिया को लाभ पहुंचाने के साथ ही बड़ी मशीनों जैसे जेसीबी और पोकलैंड के उपयोग की अनुमति देकर पवित्र नदी के स्वरूप को खत्म करने का प्रयास कर रहा है। याचिकाकर्ता का कहना था कि निविदा हेतु 19 मार्च तक आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि निर्धारित की गई थी तथा खुली नीलामी 20 मार्च को की जानी थी। प्रशासन ने 20 मार्चको खुली नीलामी कर दी। नीलामी को निरस्त करने के लिए स्थानीय लोगों द्वारा इस संबंध में जिलाधिकारी बागेश्वर को 13 मार्च को संयुक्त प्रत्यावेदन भी दिया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

याचिकाकर्ता का यह भी कहना था कि कठायतबाड़ा, सेंज, द्वाली, चौरासी, भिटालगांव, मनीखेत और आरे क्षेत्र से सरयू नदी में मैनुअल चुगान से बजरी रेता का निष्पादन हो। ऐसा करने से स्थानीय लोगों को न सिर्फ रोजगार मिलेगा बल्कि नदी भी अपने प्राकृतिक रूप में सुरक्षित रहेगी। प्रशासन के बड़े खनिज माफियाओं को आमंत्रित करने से नदी को बहुत क्षति पहुंचेगी। मशीनों द्वारा खनन से अनेकों पुलों व पानी के पंपों को खतरा उत्पन्न हो जाएगा। याचिका में कहा कि सरयू नदी में रेता बजरी की मात्रा के बिना आकलन के ही नियम विरुद्ध नीलामी की जा रही है जो कि उत्तराखंड रिवर ट्रेनिंग नीति 2020 के प्रावधानों के विपरीत है।

कोरोना के बढ़ते मामलों के चलते राज्य सरकार के नैनीताल जिले को रेड जोन में शामिल करने पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने आवश्यक वादों की ऑनलाइन फाइलिंग के बाद हार्ड कॉपी रजिस्ट्री में जमा करने के लिए 15 जून तक कि ढील दी है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल हीरा सिंह बोनाल ने सोमवार को इस आशय की जारी अधिसूचना में बताया कि नैनीताल को रेड जोन में रखने के बाद शासन से जारी गाइडलाइन के अनुसार अधिवक्ताओं और वादकारियों को हार्ड कॉपी रजिस्ट्री में जमा करने में दिक्कत हो सकती है।

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने भी पिछले दिनों हार्ड कॉपी जमा करने में असुविधा होने के संबंध में मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन दिया था। जिसके बाद मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर हार्ड कॉपी जमा करने के लिए दो सप्ताह का समय अधिवक्ताओं व वादकारियों को दिया गया है।

सार

  • प्रधानमंत्री सड़क योजना के चीफ इंजीनियर से मांगा जवाब

विस्तार

नैनीताल हाईकोर्ट ने चमोली जिले में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत सरकोट में बन रही सड़क के लिए जल स्रोत और पेड़ों को न काटे जाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने पेड़ों के कटान पर रोक लगा दी है। साथ ही मामले में सड़क योजना के चीफ इंजीनियर को चार जून तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार ग्राम सरकोट निवासी विनोद कुमार कुनियाल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत जिला चमोली में कुछ गांवों को मोटर मार्ग से जोड़ने का प्रस्ताव पास हुआ था, लेकिन सड़क बनाने के लिए चीफ इंजीनियर के सड़क का एलाइनमेंट बदलने से जल स्रोत और इन्हें रिचार्ज करने वाले पेड़ों के कटने से जल स्रोतों पर खतरा मंडरा रहा है।

याचिकाकर्ता का कहना था कि सड़क का एलाइनमेंट बदल कर इसे दूसरी जगह से बनाया जाए ताकि जलस्रोतों पर इसका प्रतिकूल असर न पड़े। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पेड़ों के कटान पर रोक लगाते हुए सड़क योजना के चीफ इंजीनियर से चार जून तक जवाब दाखिल करने को कहा है।


आगे पढ़ें

सरयू में मशीनों से खुदाई मामले में याची को आपत्ति दाखिल करने के निर्देश

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