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Thursday, August 13, 2020
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हिमालयी क्षेत्र में पाई जाने वाली ‘वियाग्रा’ कीड़ाजड़ी पर मंडरा रहा खतरा

उच्च हिमालयी क्षेत्र में पाई जाने वाली हिमालयन वियाग्रा कीड़ाजड़ी या यारशागुंबा पर अब खतरा मंडरा रहा हैं। बीते 15 साल के अंदर इसकी उपलब्धता वाले क्षेत्रों में 30 फीसदी तक कमी आने के बाद अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) ने इसे ‘रेड लिस्ट’ में डाल दिया है।
जानकार इसके पीछे इन क्षेत्रों में तेजी से बढ़े मानवीय दखल से लगातार दोहन को मान रहे हैं। ऐसे में अब इसके संरक्षण-संर्वधन के लिए राज्य सरकार की मदद से कार्ययोजना पर विचार चल रहा है। कैंसर समेत कई गंभीर रोगों में कारगर कीड़ाजड़ी 3500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में मिलती है। यह भारत के अलावा नेपाल, चीन और भूटान में हिमालय और तिब्बत के पठारी इलाकों में मिलती है।

सिर्फ स्थानीय लोगों को ही निकालने का अधिकार
कीड़ाजड़ी निकालने का अधिकार संबंधित पर्वतीय इलाके के वन पंचायत क्षेत्र से जुड़े लोगों को होता है। भेषज संघ पिथौरागढ़ के अध्यक्ष पीतांबर पंत ने बताया कि पटवारी और फारेस्ट गार्ड की रिपोर्ट के आधार पर डीएफओ इसके लिए अनुमति जारी करते हैं। कीड़ाजड़ी लोग भेषज संघ या वन विभाग में पंजीकृत ठेकेदारों को बेचते हैं। राज्य के तीन जिलों में करीब सात-आठ हजार लोगों की इससे आजीविका चलती है।

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